Gaddar Dost Shayari – गद्दार दोस्त पर शायरी

Sometimes a friend can hurt us more than an enemy because we trust them a lot. Gaddar Dost Shayari is for those moments when a close friend breaks your trust, changes after getting their work done, or shows their real face.

Here you will find Gaddar Dost Shayari in 2 lines about fake friendship, betrayal, selfish friends and changed relationships. You can share these lines on WhatsApp, Instagram or with someone who understands your feelings.

Gaddar Dost Shayari 2 Line

दोस्ती के नाम पर जो दिल में ज़हर रखते हैं,
वही लोग अक्सर पीठ पीछे खंजर रखते हैं।
हमने दोस्त समझकर हर राज़ बता दिया,
उसने मतलब निकलते ही सबको सुना दिया।
चेहरे पर हंसी थी और दिल में हिसाब था,
जिसे अपना समझा वही सबसे बड़ा गद्दार था।
वक्त पड़ा तो दोस्ती की असली पहचान हुई,
कुछ लोग साथ नहीं बस मतलब के मेहमान हुए।
हमारी खामोशी को कमजोरी समझ बैठे,
गद्दार दोस्त थे इसलिए खुद को बड़ा समझ बैठे।
दोस्ती निभाने का दावा बहुत किया उसने,
मुश्किल आई तो रास्ता बदल लिया उसने।
जिसे हर बात में अपना हिस्सा देते रहे,
वही दोस्त हमारी गैरमौजूदगी में किस्सा कहते रहे।
दिल से निभाई दोस्ती का यही अंजाम मिला,
अपनों के बीच ही हमें बेगाना नाम मिला।
Gaddar Dost Shayari 2 Line
दोस्ती में हमने कभी हिसाब नहीं रखा,
उसने हर रिश्ते को अपने मतलब से परखा।
जो सामने भाई और पीछे दुश्मन बन जाए,
ऐसे दोस्त से अच्छा इंसान अकेला रह जाए।
हमने उसकी गलतियों पर भी पर्दा रखा,
उसने हमारी अच्छाइयों का भी सौदा रखा।
गद्दार दोस्त की पहचान वक्त बता देता है,
कौन अपना है ये मुश्किल वक्त बता देता है।
कुछ दोस्त चेहरे से बहुत मासूम लगते हैं,
मौका मिलते ही वही रिश्ते नीलाम करते हैं।
हमने दोस्ती को दिल की बात समझा था,
उसने इसे सिर्फ मतलब का साथ समझा था।
जिसे अपना राजदार बनाया था कभी,
आज वही हमारी कहानी बाजार में सुनाता है।
दोस्ती में धोखा मिला तो इतना समझ आया,
हर मुस्कुराता चेहरा अपना नहीं होता।
वो दोस्त नहीं था बस जरूरत का साथी था,
काम खत्म हुआ तो पहचानना भी छोड़ दिया।
हमने उसे अपना समझकर जगह दी दिल में,
वो गद्दारी लेकर बैठा था अपनी महफ़िल में।
सच्ची दोस्ती में चेहरे नहीं बदले जाते,
मतलबी लोग ही रिश्ते बदले जाते हैं।
जिन्हें हमने अपनी खुशियों में शामिल किया,
उन्होंने ही हमारी खुशी से जलना शुरू किया।
अब दोस्ती करने से पहले वक्त देखते हैं,
क्योंकि कुछ चेहरे अंदर से अलग दिखते हैं।
जिसे समझा था अपना वो पराया निकला,
हमारा ही दोस्त हमारे खिलाफ खड़ा निकला।
गद्दार दोस्त से शिकायत भी क्या करनी,
जिसे वफादारी समझ ही न आए उससे क्या लड़नी।
अब हर दोस्त पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करते,
हम टूटे जरूर हैं मगर हर किसी पर भरोसा नहीं करते।

Dushmani Gaddar Dost Shayari

दोस्ती का चेहरा लेकर जो दुश्मनी निभाते हैं,
ऐसे लोग ही रिश्तों की असली कीमत बताते हैं।
जिसे अपना समझा वही खिलाफ हो गया,
दोस्ती का रिश्ता भी आखिर हिसाब हो गया।
हमने दोस्ती में कभी चाल नहीं चली,
उसने मुस्कुराकर हमारे खिलाफ चाल चली।
दुश्मन से तो हमेशा संभलकर रहते थे,
गद्दार दोस्तों से ही दिल के राज कहते थे।
वो दोस्त बनकर हमारी कमजोरी जान गया,
मौका मिला तो उसी बात को हथियार बना गया।
जिसे साथ लेकर हर मुश्किल पार की,
उसी ने पीछे से हमारी राह खराब की।
दुश्मनी सामने होती तो जवाब दे देते,
गद्दार दोस्त थे इसलिए कुछ कह नहीं देते।
तेरी दोस्ती का सच वक्त ने दिखा दिया,
जिसे अपना माना उसने ही दुश्मन बना दिया।
कुछ लोग दोस्ती में भी रंग बदलते हैं,
मौका मिलते ही अपनों से ही संभलते हैं।
हमने तेरे लिए हर रिश्ता भुला दिया,
तूने मौका पाकर हमें ही भुला दिया।
अब दुश्मनों से ज्यादा दोस्तों पर नजर रहती है,
क्योंकि गद्दारी अक्सर अपनों के घर रहती है।
जो कल तक हमारे साथ खड़ा दिखाई देता था,
आज वही हमारे खिलाफ खड़ा दिखाई देता है।
दोस्ती की आड़ में उसने दुश्मनी निभाई,
हमने देर से सही मगर उसकी असलियत पाई।
तेरे बदलने का हमें कोई गम नहीं,
बस अफसोस है कि तू कभी अपना था ही नहीं।
हमने दोस्ती को दिल से निभाया था,
उसने उसी रिश्ते को अपना खेल बनाया था।
सामने से मीठी बातें करने वाले बहुत मिले,
पीछे से वार करने वाले भी कम नहीं मिले।
दुश्मनी होती तो दिल तैयार रहता,
दोस्त की गद्दारी का दर्द अलग ही रहता।
अब रिश्तों में पहले जैसा भरोसा नहीं करते,
हर मुस्कान को दोस्ती का हिस्सा नहीं करते।
जिसने हमारी पीठ पर भरोसे का हाथ रखा था,
उसी हाथ ने बाद में वार करने का साथ रखा था।
हमारी खामोशी को उसने डर समझ लिया,
दोस्ती तोड़ी और खुद को सिकंदर समझ लिया।
वक्त ने तेरी दोस्ती का चेहरा साफ कर दिया,
जिसे भाई कहा था उसने ही रास्ता अलग कर दिया।
दुश्मन की बातों का हमें कभी डर नहीं लगा,
गद्दार दोस्त का बदला हुआ रंग दिल में लगा।
अब दुश्मनी भी साफ-साफ पसंद आती है,
गद्दार दोस्ती से तो दूरी ही अच्छी लगती है।
तूने दोस्ती खोई है हमने सिर्फ एक चेहरा,
अब तेरी याद भी नहीं करती हमारी सच्ची दोस्ती का पहरा।

Matlabi Gaddar Dost Shayari

मतलबी दोस्त मौसम की तरह बदल जाते हैं,
काम पड़ते ही अपने बनकर पास आते हैं।
जिसे दोस्ती का नाम देकर दिल में रखा,
उसने मतलब खत्म होते ही रिश्ता ही भुला दिया।
तेरी दोस्ती भी बड़ी अजीब कहानी निकली,
काम था तो अपनी और बाद में अनजानी निकली।
हमने दोस्ती में कभी फायदा नहीं देखा,
तूने हर रिश्ते में अपना फायदा देखा।
मतलबी लोग दोस्ती भी नापकर करते हैं,
जितना फायदा मिले उतना ही साथ चलते हैं।
Matlabi Gaddar Dost Shayari
तेरे साथ को हम सच्चा समझते रहे,
तू मतलब के हिसाब से रिश्ता बदलता रहा।
जब तक काम था तब तक अपना कहता रहा,
काम निकलते ही पहचानने से भी मुकरता रहा।
कुछ दोस्त चेहरे पर अपनापन रखते हैं,
दिल में मगर सिर्फ अपने मतलब रखते हैं।
हमने दोस्ती को रिश्ता समझकर निभाया,
उसने हमें जरूरत समझकर आजमाया।
मतलब की दोस्ती ज्यादा दिन नहीं चलती,
सच्चे रिश्तों में हर बात फायदे से नहीं ढलती।
जिसे हर मुश्किल में अपना सहारा माना,
उसने आसान वक्त में भी हमें बेगाना माना।
तेरी दोस्ती का हिसाब अब समझ आया,
जहाँ फायदा दिखा वहीं तूने हाथ बढ़ाया।
दोस्ती में धोखा देने वाले कमाल करते हैं,
पहले अपने बनते हैं फिर सवाल करते हैं।
हमने तेरे हर राज़ को राज़ ही रखा,
तूने अपने मतलब के लिए हमारा नाम रखा।
तू दोस्त कम और मतलब का मुसाफिर ज्यादा था,
तेरा हर कदम अपने फायदे के इर्द-गिर्द खड़ा था।
जब तक हमारी जरूरत थी तू पास रहा,
फिर तेरे चेहरे पर कोई और एहसास रहा।
मतलबी दोस्ती की उम्र बहुत छोटी होती है,
जहाँ फायदा खत्म हो वहाँ दोस्ती भी खोती है।
हमने दिल से निभाया इसलिए हार गए,
तुम मतलब से जुड़े थे इसलिए चालाक कहलाए।
तूने दोस्ती को अपने काम का जरिया बनाया,
हमने तुझे अपना समझकर खुद को ही समझाया।
तेरी गद्दारी ने एक बात सिखा दी,
हर दोस्ती में सच्चाई जरूरी नहीं होती।
मतलब निकला तो तेरी बातें भी बदल गईं,
कल जो अपनी थीं आज वही पराई हो गईं।
जो दोस्त सिर्फ जरूरत में याद करे,
उससे बेहतर है इंसान अकेले सफर करे।
हमने रिश्ते में अपना दिल लगा दिया,
उसने मतलब आते ही पूरा रिश्ता भुला दिया।

Gaddar Dost Shayari Attitude

गद्दारी करके तूने अपना असली रंग दिखाया,
हमने भी चुप रहकर तुझे तेरी जगह बताया।
दोस्ती का नाम लेकर जो वार करते हैं,
हम ऐसे चेहरों से अब किनारा करते हैं।
तूने पीठ पीछे जो खेल खेला है,
अब हमारा खामोश रहना भी तेरा डर है।
हम दोस्ती में दिल साफ रखते हैं,
गद्दारों के लिए रास्ते साफ रखते हैं।
तेरी गद्दारी से हम टूटे नहीं,
बस अब तेरे जैसे लोगों से झुके नहीं।
जिसे अपने होने का बड़ा घमंड था,
आज वही हमारी नजरों से बाहर था।
हमने तुझे दोस्त समझकर सम्मान दिया,
तूने गद्दारी की तो रिश्ता वहीं खत्म किया।
अब न तेरी जरूरत है न तेरी बात चाहिए,
गद्दार दोस्त से बस थोड़ी दूरी चाहिए।
पीठ पीछे बोलने वालों से क्या डरना,
हमारा नाम ही काफी है जवाब देने को।
तूने दोस्ती को कमजोरी समझ लिया,
हमने तेरी गद्दारी को सबक समझ लिया।
हम बदलते नहीं किसी के बदलने से,
बस दूर हो जाते हैं नकली रिश्ते निभाने से।
गद्दारी तेरी आदत होगी,
लेकिन जवाब देना हमारी फितरत नहीं।
हमारी खामोशी को हार मत समझना,
हम हर रिश्ते का जवाब वक्त पर देते हैं।
जो दोस्त बनकर दुश्मनी दिखाते हैं,
हम उन्हें दोस्ती की लिस्ट से मिटाते हैं।
हमसे गद्दारी करके खुश मत होना,
हम जिन्हें छोड़ते हैं फिर मुड़कर नहीं देखते।
तेरी चालों से हमारी पहचान नहीं बदलती,
गद्दारों की वजह से हमारी शान नहीं घटती।
हमने दोस्ती निभाई थी पूरी शिद्दत से,
तूने तोड़ दी तो अब याद भी नहीं करते।
गद्दारों को जवाब शब्दों से नहीं देते,
बस अपनी जिंदगी से उनका नाम हटा देते हैं।
तेरा साथ था तो हमने तुझे अपना माना,
तेरी गद्दारी ने तेरा सच पहचाना।
जिसे अपनी जीत पर बहुत नाज था,
वो भूल गया कि हमारा जवाब अभी बाकी था।
गद्दारी करके तू खुद से ही हार गया,
हमसे दूर होकर अपना एक सच्चा यार गया।
हमारी जिंदगी में किरदार बहुत आएंगे,
पर गद्दारों को हम कभी दोबारा नहीं बुलाएंगे।

Gaddar Dost Shayari is for those times when a friend breaks your trust and shows their real side. Sometimes it is better to stay away from fake and selfish friends and keep peace in your life. I hope these shayari help you express your feelings in simple words.

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